शुक्रवार, 26 मई 2023

What is Mudra Therapy? What is the benefits of mudra therapy?


Mudra therapy is a form of complementary and alternative medicine that uses hand gestures to promote physical and mental health. The word mudra comes from the Sanskrit word mudra, which means “seal” or “gesture.” Mudras are believed to have the power to balance the body’s energy and promote healing.

Mudra therapy is a part of the ancient Indian tradition of yoga. Yoga is a holistic system of physical, mental, and spiritual practices that have been practiced for thousands of years. Mudras are one of the many tools that are used in yoga to promote health and well-being.

There are many different mudras, each with its own specific benefits. Some mudras are used to improve physical health, while others are used to promote mental and emotional well-being. Some mudras can be used to treat specific health conditions, while others can be used to promote general health and well-being.

To perform a mudra, you simply need to place your hands in the specific gesture. You can do this while sitting, standing, or lying down. You can also do mudras while you are meditating, praying, or performing other yoga poses.

There is no one right way to do a mudra. The most important thing is to find a way that feels comfortable and natural for you. You may want to experiment with different hand positions until you find one that feels right.

Once you have found a comfortable hand position, you can hold the mudra for a few minutes or longer. You may want to close your eyes and focus on your breath as you hold the mudra.

Mudra therapy is a safe and effective way to promote health and well-being. There are no known side effects of mudra therapy. However, it is important to talk to your doctor before you start using mudra therapy if you have any health concerns.

Here are some of the benefits of mudra therapy:

  • Improves physical health: Mudras can help to improve physical health in a number of ways. For example, some mudras can help to relieve pain, improve circulation, and boost the immune system.
  • Promotes mental and emotional well-being: Mudras can also help to promote mental and emotional well-being. For example, some mudras can help to reduce stress, improve focus, and boost mood.
  • Treats specific health conditions: Mudras can also be used to treat specific health conditions. For example, some mudras can help to relieve headaches, improve digestion, and reduce anxiety.

If you are interested in trying mudra therapy, there are a number of resources available to help you get started. There are many books and websites that offer instructions on how to perform different mudras. You can also find classes and workshops on mudra therapy in many communities.

Mudra therapy is a safe and effective way to promote health and well-being. If you are looking for a natural way to improve your health, mudra therapy is a great option.

Here are some of the most common mudras and their benefits:

  • Adi Mudra: This mudra is believed to promote overall health and well-being. To perform it, simply place your hands together with the palms facing each other and the fingers interlaced.
  • Gyan Mudra: This mudra is believed to promote concentration and focus. To perform it, simply touch the tip of your index finger to the tip of your thumb.
  • Chin Mudra: This mudra is believed to promote relaxation and stress relief. To perform it, simply place the tip of your middle finger on the tip of your thumb.
  • Lotus Mudra: This mudra is believed to promote creativity and imagination. To perform it, simply place the tips of your thumb, index finger, and middle finger together.
  • Abhaya Mudra: This mudra is believed to promote courage and confidence. To perform it, simply extend your index finger and spread your other fingers wide.

These are just a few of the many mudras that are available. With a little practice, you can learn to use mudra therapy to promote your own health and well-being.

शंख मुद्रादि विशेष 21 मुद्राएं


१. मणि मुद्रा:अपने हाथों को अपनी छाती के सामने बाएं ओर मोड़ें। अपने अंगूठे को अपनी छाती की ओर ले जाएं और उसे अपनी छाती से मिलाएं। अन्य उंगलियों को आराम से सीधा रखें।


२. शंख मुद्रा:अपने दोनों हाथों की अंगूठे को अपने दोनों कानों के पास ले जाएं। अपने दोनों बाएं हाथ के अंगूठे को अपने बाएं कान के पास रखें और दाएं हाथ के अंगूठे को अपने दाएं कान के पास रखें। उंगलियों को आराम से सीधा रखें।

३. शून्य मुद्रा:अपने दोनों हाथों की अंगूठे को अपनी छाती के सामने ले जाएं। अपने अंगूठे को अपनी छाती से मिलाएं और उसे थोड़ा सा नीचे की ओर दबाएं। अन्य उंगलियों को आराम से सीधा रखें।

४. आदि मुद्रा:अपने बाएं हाथ की अँगूठी को अपने बाएं नासिकारे के पास रखें। दाएं हाथ की अँगूठी को अपने दाएं नासिकारे के पास रखें। उंगलियों को आराम से सीधा रखें।

५. पूष्पक मुद्रा:अपने हाथों की अंगूठी को आपस में जोड़ें। अपने दोनों हाथों की अंगूठियों को अपनी छाती के सामने रखें और अपने हृदय की ओर दबाएं। उंगलियों को आराम से सीधा रखें।

६. पुष्टि मुद्रा:अपने बाएं हाथ की अंगूठी को अपने दाएं हाथ की अंगूठी के समक्ष रखें। दोनों हाथों की अंगूठियों को आपस में स्पर्श करें। उंगलियों को आराम से सीधा रखें।

७. तारा मुद्रा:अपने दोनों हाथों की अंगूठी को आपस में जोड़ें। अपने दोनों हाथों की उंगलियों को सीधा रखें और उभरे हुए अंगूठों को आपस में स्पर्श करें।

८. त्रिपुर मुद्रा:अपने दोनों हाथों की अंगूठी को अपनी छाती के सामने ले जाएं। अपने दोनों हाथों की अंगूठियों को आपस में स्पर्श करें। उंगलियों को आराम से सीधा रखें।

९. त्रिशूल मुद्रा:अपने दोनों हाथों की अंगूठी को अपनी छाती के सामने ले जाएं। अपने बाएं हाथ की अंगूठी को अपने बाएं कान के पास रखें, दाएं हाथ की अंगूठी को अपने दाएं कान के पास रखें और मध्यम अंगूठा अपने नासिकारे के पास रखें। अन्य उंगलियों को आराम से सीधा रखें।

१०. दामर मुद्रा:अपने दोनों हाथों की अंगूठी को आपस में जोड़ें। अपने दोनों हाथों की अंगूठियों को आपस में स्पर्श करें। उंगलियों को आराम से सीधा रखें।

११. द्रुम मुद्रा:अपने दोनों हाथों की अंगूठी को अपनी छाती के सामने ले जाएं। अपने बाएं हाथ की अंगूठी को अपने बाएं कान के पास रखें, दाएं हाथ की अंगूठी को अपने दाएं कान के पास रखें और मध्यम अंगूठा अपने नासिकारे के पास रखें। अन्य उंगलियों को आराम से सीधा रखें।

१२. धनुर्मुद्रा:अपने दोनों हाथों की अंगूठी को आपस में जोड़ें। अपने हाथों को सीधा बनाएं और उभरे हुए अंगूठों को आपस में स्पर्श करें।

१३. नटराज मुद्रा:अपने दोनों हाथों को ऊपर की ओर उठाएं और उभरे हुए अंगूठों को आपस में स्पर्श करें। बाएं हाथ को शीशा बनाएं और दाएं हाथ को झुलाएं। उंगलियों को आराम से सीधा रखें।

१४. नागमुद्रा:अपने दोनों हाथों की अंगूठी को अपनी छाती के सामने ले जाएं। अपने दोनों हाथों की अंगूठियों को अपनी छाती के नीचे रखें। उंगलियों को आराम से सीधा रखें।

१५. पद्म मुद्रा:अपने दोनों हाथों की अंगूठी को अपने नासिकारे के सामने ले जाएं। अपने दोनों हाथों की अंगूठियों को अपनी नासिका के नीचे रखें। उंगलियों को आराम से सीधा रखें।

१६. पद्मासन मुद्रा:अपने बाएं हाथ की अंगूठी को अपने बाएं कान के पास रखें, दाएं हाथ की अंगूठी को अपने दाएं कान के पास रखें और मध्यम अंगूठा अपने नासिकारे के पास रखें। अन्य उंगलियों को आराम से सीधा रखें।

१७. पद्मभंज मुद्रा:अपने दोनों हाथों की अंगूठी को अपनी छाती के सामने ले जाएं। अपने दोनों हाथों की अंगूठियों को आपस में स्पर्श करें। उंगलियों को आराम से सीधा रखें।

१८. परमहंस मुद्रा:अपने बाएं हाथ की अंगूठी को अपने बाएं कान के पास रखें, दाएं हाथ की अंगूठी को अपने दाएं कान के पास रखें और मध्यम अंगूठा अपने नासिकारे के पास रखें। अन्य उंगलियों को आराम से सीधा रखें।

१९. पशुराज मुद्रा:अपने बाएं हाथ की अंगूठी को अपने बाएं कान के पास रखें, दाएं हाथ की अंगूठी को अपने दाएं कान के पास रखें और मध्यम अंगूठा अपने नासिकारे के पास रखें। अन्य उंगलियों को आराम से सीधा रखें।

. परिधान मुद्रा:अपने दोनों हाथों की अंगूठी को आपस में जोड़ें। अपने हाथों को सीधा बनाएं और उंगलियों को आराम से सीधा रखें।

. पद्मोद्यन मुद्रा:अपने बाएं हाथ की अंगूठी को अपने बाएं कान के पास रखें, दाएं हाथ की अंगूठी को अपने दाएं कान के पास रखें और मध्यम अंगूठा अपने नासिकारे के पास रखें। अन्य उंगलियों को आराम से सीधा रखें।


सोमवार, 15 मई 2023

Who is Anantbodh Chaitanya?

 


Anantbodh Chaitanya is a renowned spiritual guru who has dedicated his life to guiding people toward self-realization and inner peace. Born in India, Anantbodh Chaitanya has spent his entire life studying and practicing various spiritual traditions, including yoga, meditation, and Vedanta.

Through his teachings, Anantbodh Chaitanya emphasizes the importance of self-awareness, mindfulness, and compassion. He believes that by cultivating these qualities, individuals can overcome their negative thoughts and emotions and connect with their true selves.

Anantbodh Chaitanya is also known for his ability to simplify complex spiritual concepts and make them accessible to people from all walks of life. He has written several books and conducts regular workshops and retreats around the world to help people deepen their spiritual practice.

Many people who have worked with Anantbodh Chaitanya describe him as a compassionate and insightful teacher who has helped them transform their lives. His teachings have inspired countless individuals to embark on a path of self-discovery and spiritual growth, and his influence continues to be felt around the world.

गुरुवार, 4 मई 2023

श्री अनन्तबोध चैतन्य का जीवन परिचय



जीवन परिचय :- श्री अनन्तबोध चैतन्य का जन्म इतिहास प्रसिद्ध हरियाणा के पानीपत जिले  में हुआ । बचपन मे उनका नाम सतीश रखा गया। सतीश बचपन से ही बहुत ही कुशाग्र बुद्धि के रहे । घर का वातावरण धार्मिक होने के कारण इनको अनेक दंडी स्वामी और नाथ पंथ के महात्माओ का सानिध्य अनायास ही मिलता रहा। विभिन्न गुरुकुलों मे शिक्षा होने के कारण 18 वर्ष की छोटी उम्र मे ही इन्हें व्याकरण के प्रसिद्ध ग्रंथ अष्टाध्यायी आदि के साथ-साथ न्याय वेदान्त के अनेक ग्रंथ जैसे तर्कसंग्रह, वेदांतसार आदि तथा वेदों के भी कुछ अंश कंठाग्र कर लिया था। उपनिषदों का भी इन्हे अच्छा बोध हो गया । 
इनके पिता जी की सत्संग प्रियता एवं सौम्य प्रकृति के फलस्वरूप भगवतसत्ता के प्रति ललक एवं आत्म जिज्ञासा ने इन्हे अध्यात्म की राह मे लगा दिया। अनन्तबोध चैतन्य बाल्यकाल से ही शक्ति के उपासक रहे हैं। 
 
शिक्षा:- प्रारम्भिक शिक्षा के बाद अनेक गुरुकुलों एवं विद्यालयो में अद्ध्यन करते हुए इन्होंने कतिपय आचार्यों से शिक्षा प्राप्त की। इन्होने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय,कुरुक्षेत्र से संस्कृत भाषा , भारतीय दर्शन के साथ स्नातक (शास्त्री) तथा दर्शन शास्त्र विषय में मास्टर्स डिग्री प्राप्त की बाद मे भारतीय दर्शन मे ज्ञान विषय से पी एच डी शोधकार्य को संपूर्णानन्द संस्कृत विश्व विद्यालय, वाराणसी को प्रस्तुत किया है । 
दीक्षा:- सबसे पहले गंगा जी के पावन तट, बिहार घाट(नरौरा,उत्तर प्रदेश) मे परम विरक्त तपस्वी दंडी स्वामी श्री विष्णु आश्रम जी के दर्शनों ने इनके जीवन की दिशा को बदल दिया उनकी आज्ञा से धर्मसम्राट करपात्रि जी महाराज की तपस्थली नरवर, नरौरा मे श्री श्यामसुंदर ब्रह्मचारी जी (बाबा गुरु जी)  से स्वल्प समय मे ही प्रस्थानत्रयी का अद्ध्यन किया तथा आत्मा एवं ब्रह्म की एकता को स्वीकार किया। आपने 2003 में स्वामी चेतनानन्द पुरी जी से शक्तिपात व पीताम्बरा की दीक्षा ली। इसके बाद अप्रेल 2005 मे विश्व प्रसिद्ध गोविंद मठ की महान परंपरा मे पूज्य महाराज आचार्य महामंडलेश्वर निर्वाण पीठाधीश्वर ब्रह्मलीन स्वामी श्री विश्वदेवानन्द पुरी जी से अद्वैत मत में दीक्षित हुए एवं इनका नाम ‘अनन्तबोध चैतन्य’ पड़ा। 
प्रारम्भिक जीवन:- अनन्तबोध चैतन्य की आध्यात्मिक यात्रा हिमालय की तलहटी के अनेक महान संतों और साधुओं की संगत में गहन आध्यात्मिक प्रशिक्षण के माध्यम से आध्यात्मिक उत्कृष्टता प्राप्त करने में आठ साल बिताने के साथ शुरू हई । . 
• इन्होने आदि शंकराचार्य संप्रदाय से संबंधित महानिर्वाणी अखाडे मे वैदिक शास्त्रों की सेवा करने के लिए और भारतीय विरासत और संस्कृति के आध्यात्मिक मूल्यों के लिए अपना जीवन समर्पित करने का संकल्प लिया। 
 • बचपन की गतिविधियों एवं आध्यात्मिक जीवन के लिए बहुत गहरे आकर्षण को देखते हुये कुछ महापुरुषों ने पहले ही कह दिया था कि एक दिन ये बालक आत्मबोध और मानवता की सेवा के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित करेंगा। सनातन धारा की स्थापना:- देश के सांस्कृतिक, शैक्षणिक एवं सामाजिक और राष्ट्रीय नवजागरण के लिए सनातन धारा की स्थापना की।
 मानव मात्र को इससे नई चेतना मिली और अनेक संस्कारगत कुरीतियों से छुटकारा मिला। गरीब एवं बेसहारा विद्याथियों के लिए छात्रवृति प्रारम्भ की । जिसका लाभ बहुत सारे विद्यार्थी वर्तमान समय मे उठा रहे है। 
 अद्ध्यापन अनुभव:- 
 • अनन्तबोध चैतन्य जी हमेशा शास्त्र, संस्कृत भाषा, भारतीय दर्शन और संस्कृति के अपने विशाल ज्ञान के प्रसार में रुचि रखते है । 
 • इन्होंने पिछले10 वर्षों के दौरान सैकड़ों छात्रों को इन विषयों मे पारंगत बनाया । 
 • शिवडेल स्कूल, हरिद्वार में एक आध्यात्मिक सलाहकार के रूप में कई वर्षो तक अपनी सेवा प्रदान की। 
 • वह हमेशा उनके उन्नत शोध और अध्ययन में भारतीय और विदेशी दोनों प्रकार के लोगों को मदद प्रदान करते रहते है। 
 • इन्होने माल्टा, यूरोप में एक मुद्रा अनुसंधान समूह शुरू किया है जो मानव मात्र को चिकित्सा एवं अध्यात्म मे सहायता मिल रही है।
  • इन्होने लिथुआनिया में योग एवं अध्यात्म के प्रचार व प्रसार के लिए "अनंतबोध योग" नामक योग केंद्र की स्थापना की। जहाँ पिछले 10 वर्षो से योग विद्या को फैला रहे है। आप वहां लोकल गवरमेंट के साथ मिलकर योग सीखा रहे है। 
  
 प्रकाशन:- 
• कई पत्र और पत्रिकाओं के लिए लेख लिखने के अलावा संस्कृत अनुसंधान के महान वेदांत साहित्य संपादन में सहायता प्रदान की। सनातन धारा और उपनिषदों के रहस्य का आध्यात्मिक और सार्वभौमिक महत्व अंग्रेजी में अनुवादित किया है। 
 • संस्कृतभाषा में एक विशेष पाठ्यक्रम जल्द ही छात्रों को उपलब्ध कराने जा रहे है । 
 • इनकी श्री विद्या पर " श्री विद्या साधना सोपान" पुस्तक प्रकाशित है । 
 
समाज सेवा और क्रियाएँ:- 
•  इन्होनें बच्चों के कल्याण, स्वास्थ्य देखभाल आदि के लिए 2000 में वीर सेवा समिति की स्थापना की । 
 • इन्होनें 2011 में वैश्विक मिशन के साथ सनातन धारा फाउंडेशन ट्रस्ट की स्थापना की। 
 • आपने 2012 में श्री दिनेश गौतम जी के साथ मिलकर दृष्टि फाउंडेशन ट्रस्ट, अहमदाबाद में स्थापना की। 
 • अन्य लोगों और आश्रमों द्वारा अपनाई गयी परोपकारी और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए इनकी नि: स्वार्थ सेवाओं ने सभी संन्यासियों और भिक्षुओं के बीच में इन्हे बहुत लोकप्रिय बना दिया है। 
• सन 2005 से तमाम दुनिया भर के छात्रों को उपनिषदों, श्रीमदभगवतगीता और योग सूत्रों पर इनका प्रवचन लाभ श्री यंत्र मंदिर, कनखल, हरिद्वार में नियमितरूप से उपलब्ध है । 
 • समय समय से कई संस्थाओं के सदस्य और एक योग्य प्रशासक के रूप में उनके विकास के लिए अपना मूल्यवान निर्देशन भी देते रहे है। 
 • इनको सन 2011 मे श्री विद्या साधना पर प्रवचन देने के लिए मलेशिया से आमंत्रण मिला और इन्होने उसे सहर्ष स्वीकार कर एक महीने तक मलेशियावासियो को अपना अमूल्य प्रवचन लाभ प्रदान किया। 
 • तत्पश्चात सन 2012 मे पर्थ, ऑस्ट्रेलिया वासियों को गीता और योग सूत्रो पर अपने उत्कृष्ट उपदशों से लगातार 3 महीने तक लाभान्वित किया। 
 • इन्होने सन 2011में बैंकाक, थाईलैंड में हिंदू धर्म का सफल प्रतिनिधित्व किया है । 
 • इन्होने 2013 में बोन्तांग, कालिमन्तान, इंडोनेशिया में सभी धर्मों के बीच सद्भाव विषय पर शानदार व्याख्यान दिया । 
 • इनके देश विदेश मे सफल सफल ज्ञान प्रसार अभियान को देखते हुये एक आध्यात्मिक नेता के रूप बाली इंडोनेशिया में हिंदू शिखर सम्मेलन 2012, 2013, और 2014 में आमंत्रित किया गया । 
 • ये मुद्रा सिखाने के लिए जनवरी 2014 मे माल्टा, यूरोप मे 15 दिन के लिए गए और बहुत से लोगो ने उनके सफल प्रयोग की सराहना की। 
 • इन्हे जकार्ता, इंडोनेशिया के बैंक में रामायण के अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी के दौरान अपने बहुमूल्य अंतर्दृष्टि प्रदान करने के लिए एक मुख्य वक्ता के रूप में सर्वोच्च प्रशंसा के साथ सम्मानित किया गया । 
• इन्होने जनवरी 2014 में माल्टा, यूरोप में ' मुदाओ के द्वारा चिकित्सा ' के विषय पर एक कार्यशाला का आयोजन किया।
• इन्होने जून 2015 में लिथुआनिया के योनावा नमक शहर में "अनंतबोध योग" की स्थापना की। 
•  इन्होने सितम्बर 2017  वसुधैव कुटुंबकम की भावना को ध्यान में रखते हुए Namai Pasauliui, všį जो एक गैर सरकारी संघ है को बनाया जिसके माध्यम से समाज हित एवं भारतीयता तथा वैदिक मूल्यों को बढ़ावा दिया। 
•  आपको 2018  में जर्मनी में प्रवचन करने का आमत्रण मिला जिसे आपने सहर्ष स्वीकार किया। 
•  आपने 2019 में लातविया के रीगा में स्वास्थ्य व वैदिक विज्ञान के ऊपर व्याख्यान दिया। 
•  आप मई 2022 में नीदरलैंड के दक्षेश्वर महादेव मंदिर में शिव तत्व पर प्रवचन देने के लिए गए। नीदरलैंड के कई शहरो में आपने अपने व्याख्यानों से काफी लोगो को लाभ पहुंचाया। 
• आप  धार्मिक सद्भाव और विश्व बंधुत्व के एक मिशन के साथ दुनिया भर की यात्रा कर रहे है।